The Rest Frame
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ग़ज़ल Ghazal 3

\   जैसा मिलता है उससे मन बहला लेता हूँ ज़िन्दगी में ज़िन्दगी से काम चला लेता हूँ, यूँ तो जहाँ में बहुत शिकायतें भरी पड़ी हैं कामयाबी  की सोच से रोटी गला लेता हूँ, यूँ तो दुनिया में ग़म ही ग...

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Dawat 2

\   मोहम्मद सद्दाम हुसैन जावेद रंगरेज शक़्ल से बहुत भोले दिमाग से तेज, शक़्ल इतनी भोली कि लगती विचित्र स्कूल से थे वो हमारे एक अजीज मित्र। हमारे घर आए; लगा कोई काम बनाने आए पर वो तो सब्जी खाने आए,...